माता ब्रह्मचारिणी हिमालय और मैना की पुत्री हैं। इन्होंने देवर्षि नारद जी के कहने पर भगवान शंकर की ऐसी कठोर तपस्या की जिससे प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने इन्हें मनोवांछित वरदान दिया। जिसके फलस्वरूप यह देवी भगवान भोले नाथ की वामिनी अर्थात पत्नी बनी। जो व्यक्ति अध्यात्म और आत्मिक आनंद की कामना रखते हैं उन्हें इस देवी की पूजा से सहज यह सब प्राप्त होता है। देवी का दूसरा स्वरूप योग साधक को साधना के केन्द्र के उस सूक्ष्मतम अंश से साक्षात्कार करा देता है जिसके पश्चात व्यक्ति की ऐन्द्रियां अपने नियंत्रण में रहती और साधक मोक्ष का भागी बनता है। इस देवी की प्रतिमा की पंचोपचार सहित पूजा करके जो साधक स्वाधिष्ठान चक्र में मन को स्थापित करता है उसकी साधना सफल हो जाती है और व्यक्ति की कुण्डलनी शक्ति जागृत हो जाती है। जो व्यक्ति भक्ति भाव एवं श्रद्धादुर्गा पूजा के दूसरे दिन मॉ ब्रह्मचारिणी की पूजा करते हैं उन्हें सुख, आरोग्य की प्राप्ति होती है और प्रसन्न रहता है, उसे किसी प्रकार का भय नहीं सताता है।
ब्रह्मचारिणी : ब्रह्मचारिणी अर्थात् जब उन्होंने तपश्चर्या द्वारा शिव को पाया था। एक हाथ में रुद्राक्ष की माला और दुसरे हाथ में कमंडल धारण करने वाली देवी का यह ब्रह्मचारिणी स्वरुप कल्याण और मोक्ष प्रदान करने वाला है। देवी के ब्रह्मचारिणी स्वरुप की आराधना का विशेष महत्व है। माँ के इस रूप की उपासना से घर में सुख सम्पति और समृद्धि का आगमन होता है।
(1) चमेली हरश्रृंगार या किसी भी सफ़ेद फूल को ६ लौंग और एक टुकड़े कपूर के साथ रुपदेवी सर्वभूतेषु विद्यारुपेण संस्तिथा नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमो नम: पढ़ते हुए ५४ आहुतियाँ नित्य माँ दुर्गा के सामने देने से उत्तम विद्या प्राप्त होती है.
उपाय:-(२) बच्चे के सिर से पैर तक एक धागा नाप कर तोड़ लें उसमे, या देवी सर्वभूतेषु विद्यारुपेण संस्तिथा नमस्तस्यै,नमस्तस्यै,नमस्तस्यै नमो नम: पढ़ते हुए ५४ गांठे लगाइए, इसे माता को समर्पित कर के नवरात्र भर इस धागे का जप करे. नवमी के दिन धागा जल में प्रवाहित कर दे.
उपाय (३):- ब्राह्मी बूटी पर या देवी सर्वभूतेषु विद्यारुपेण संस्तिथा नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:१०८ बार पढ़ें और ब्राह्मी बच्चो को खिला दें ७ दिन लगातार ऐसा करने से बालक मेधावी हो जाता है
उपाय (४):- सात दालों का चूरा बनाकर उनपर ‘ या देवी सर्वभूतेषु विद्यारुपेण संस्तिथा नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ११०० बार पढ़ें बच्चे का हाँथ लगाकर किसी पेड़ की जड़ में रखे या चिड़ियों को खिलाएं।