तीन साल नहीं कर पाए मंचन
समिति संरक्षक राकेश पाठक पीआरओ के अनुसार 1939 में दूसरे विश्व युद्ध के आसार बने हुए थे। अंग्रेजों ने किसी तरह के सार्वजनिक आयोजनों पर रोक लगा रखी थी। जिसके चलते उस साल रामलीला का मंचन नहीं हो सका। साल 1964 और 1965 में भारत-पाकिस्तान के बीच जंग छिड़ गई। युद्ध में जबलपुर स्थित फैक्ट्रियों की भूमिका अहम थी साथ ही हालात भी सामान्य नहीं थे, जिसके चलते लगातार दो साल तक रामलीला का मंचन नहीं किया जा सका। इसके बाद से आज तक मंचन निर्वाद्ध जारी है।
मुकुट पहनकर बन जाते हैं भगवान
श्री गोविंदगंज रामलीला का शुभारंभ भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, माता सीता और भक्त हनुमान के मुकुट पूजन से होता है। इन मुकुटों को धारण करने के बाद साधारण पात्र लोगों के लिए भगवान स्वरूप हो जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि मुकुट में भगवान श्रीराम की विशेष कृपा होती है। यही वजह है कि बिना मुकुट पूजन के रामलीला का शुभारंभ नहीं होता है। आज शाम को मुकुट पूजन के पूर्व शोभायात्रा क्षेत्र भ्रमण पर निकाली जाएगी। जिसके बाद मंच पर उनका विधि विधान से पूजन तथा देव आह्वान किया जाएगा। बुधवार को राम जन्म से रामलीला का मंचन शुरू हो जाएगा।