पथरीले मार्ग पर चलते हुए लगभग 3-4 घंटे में 3 किलोमीटर यात्रा करके 11500 फुट की ऊँचाई पर ‘पिप्सु टाप’ पर पहुँच कर थोड़ा विश्राम कर यात्री ‘शेषनाग’ अर्थात् दूसरे पड़ाव की ओर बढ़ते हैं। मार्ग में जोझीपाल और नागाकोटी में थोड़ा रुक कर थकान मिटाने के 12500 फुट की ऊँचाई पर (चंदनबाड़ी) से 14 किलोमीटर दूर शेषनाग पहुँचते हैं। चारों ओर ऊँची पहाड़ियों से घिरी एक विशाल झील है, जिसकी गहराई का अनुमान लगा पाना कठिन है। यहाँ पर शेषनाग का निवास माना जाता है। कहते हैं वह कभी-कभी ही भक्तों को दर्शन देते हैं। यहाँ टेण्ट हाउस में विश्राम की व्यवस्था रहती है तथा लंगर भी होता रहता है। बार्डर सेक्योरिटी फोर्स के टेण्ट हाउस में आपातकालीन चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध रहती है। अगले दिन 13 किलोमीटर की पंचतरणी (तीसरे पड़ाव) की यात्रा प्रारंभ होती है। यह अत्यंत ही कठिन मार्ग है। अगला स्थान 14800 फुट ऊँचा है। यहाँ ऑक्सीजन की कमी से सांस फूलने लगती है तथा सर्दी और तेज बर्फीली हवा भी बढ़ जाती है। इस शीर्ष शृंखला पर थोड़ा विश्राम करके पंचतरणी के लिए नीचे उतरना पड़ता है। मार्ग में राबीबाल तथा पोशपयरी होते हुए तीसरे पड़ाव पंचतरणी पर विश्राम एवं ठहराव होता है। यहाँ भी चिकित्सा सुविधा, विश्राम तथा लंगर की पूरी व्यवस्था रहती है। यहाँ भी चिकित्सा सुविधा, विश्राम तथा लंगर की पूरी व्यवस्था रहती है। यहाँ से अमरनाथ गुफा की दूरी 7 किलोमीटर है। यह गुफा 13600 फुट की ऊँचाई पर स्थित है। इस यात्रा में कुछ लोग घोड़े पर भी जाते हैं, जिसकी व्यवस्था पहले करनी पड़ती है। दर्शन के पूर्व अमरावती झरने में स्नान करना पड़ता है। अमरनाथ की गुफा लगभग 60 फुट लंबी 28 फुट चौड़ी है। इसकी ऊँचाई 15 फुट है। यह आयताकार गुफा है।