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अमरनाथ यात्रा

जम्मू कश्मीर राज्य में स्थित अमरनाथ बहुत पवित्र तीर्थस्थल है। अमरनाथ धाम विश्व प्रसिद्द बर्फानी शिव लिंग के साथ महामाया शक्तिपीठ की भी भक्तो में बहूत बड़ी मान्यता है। कहते है इस जगह ही भगवान् शिव ने अपनी पत्नी पार्वती को अमरता का ज्ञान दे रहे थे | यह मंदिर भी अमरनाथ की पवित्र गुफा में ही है ।इस जगह देवी सती की गर्दन गिरी थी और इस तरह यह जगह 51 शक्तिपीठो में से एक है । यहा शिव भैरो को त्रिसंध्येश्वर के नाम से पूजा जाता है।अमरनाथ की इस पवित्र गुफा में जहां भगवान शिव के हिमलिंग का दर्शन होता है वहीं हिमनिर्मित एक पार्वतीपीठ भी बनता है, यहीं पार्वतीपीठ महामाया शक्तिपीठ के रूप में मान्य है।

किस जगह है यह महामाया अमरनाथ शक्तिपीठ

अमरनाथ शक्तिपीठ भारत के कश्मीर में श्रीनगर से 141 किमी की दुरी 12700 फ़ीट की ऊंचाई पर स्तिथ है।अमरनाथ की यात्रा दुरूह है। अमरनाथ गुफा तक जाने के लिए दो रास्ते है। पहला बलतल जो श्रीनगर से 70 किमी की दुरी पर है, यह मार्ग पैदल चलने की दृष्टि से छोटा ज़रूर है, पर काफ़ी खतरनाक है। क्योंकि बरसात से ख़तरा बढ़ जाता है। दूसरा मार्ग पहलगाम से शुरू होता है, जो चंदनबाड़ी, शेषनाग, पंचतरणी होकर जाता है। यह रास्ता बलतल रास्ते से ज्यादा अच्छा है और चन्दंवारी से 16 किमी की दुरी पर पवित्र अमरनाथ गुफा है। अधिसंख्य यात्री इसी इसी मार्ग को अपनाते है हैं। जम्मू से पहलगाम तक 12 घण्टे बस की यात्रा रात्रिविश्राम पहलगाम में करके यात्रा प्रारम्भ होती है। पहला पड़ाव 14 किलोमीटर दूर चन्दनबाड़ी में होता है। यह दूरी पैदल या मिनी बस से की जा सकती है। 9500 फुट की ऊँचाई पर स्थित चंदनबाड़ी में सर्द हवा तथा ठण्ड लगने लगती है। यहाँ पर यात्रा के लिए नुकीली छड़ियाँ ख़रीद ली जाती हैं, क्योंकि यहाँ पर पदयात्रा प्रारंभ होती है। लगभग 32 किलोमीटर सीधी यात्रा चढ़ाई वाली मार्ग होने से काफ़ी कठिन लगती है। हर साल स्थानीय सरकार शिव भक्तो के लिए वार्षिक अमरनाथ यात्रा की व्यवस्था कराती है।यात्रा मुख्य रूप से जून से अगस्त तक होती है। इस गुफा में भक्तों को विभूति का प्रसाद दिया जाता है। यह गुफा मात्र कुछ दिनों के लिए आषाढ़ से श्रावण पूर्णिमा तक ही खुलती है।