जबलपुर नवरात्री । जबलपुर शहर का ऐतिहासिक पंजाबी दशहरा हर वर्ष श्रधालों में आकर्षण का केंद्र होता है। इस दशहरा का रावण दहन सर्वाधिक आकर्षण का केंद्र होता है। रावण के साथ ही कुंभकरण और मेघनाथ स्वरुप का दहन किया जाता है। पंजाबी दशहरा में हर बार रावण और कुंभकरण के पुतलों की ऊंचाई मुख्य आकर्षण का केन्द होती है। बताया जाता है कि इन पुतलों की हाइट इतनी अधिक होने की वजह से देखने वाले इन्हें या तो ऊंचाई से खड़े होकर देखते हैं या फिर नीचे से ऊपर तक देखने पर लोगों की गर्दन पीछे ओर कमर तक झुक जाती है। ऐसा भी कहा जा सकता है कि जब तक कमर तक शीश ना झुकाया जाए रावण को पूरा देखना संभव नहीं होता और यहां प्रतिवर्ष यहां लगभग 40 - 50 हजार लोग इस भव्य कार्यक्रम को देखने आते हैं।
पंजाबी-हिन्दू एसोसिएशन के तत्वावधान में वर्ष 1950 में पेशकारी स्कूल छोटी ओमती में पंजाबी दहशहरा की शुरुआत हुई थी।
1. रावण व कुंभकरण का पुतला बड़ा होने की वजह से कंट्रोल रूम में इसका आयोजन हुआ।
2. वर्ष 1953 में प्रशासन ने NCCमैदान में आयोजन कराया।
3. 1981 में प्रशासन ने राइट टाउन स्टेडियम में अनुमति दी।
4. वर्ष 2015 में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए स्पष्ट कर दिया था कि अगले वर्ष से समिति व प्रशासन नई जगह तय कर दी।
पंजाबी दशहरे की खास बात यह है रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाथ के पुतले को आलम आतिशबाज नामक कलाकार बनाता है। यह कलाकार पिछले 35 वर्षों से पंजाबी दशहरे में दहन किये जाने वाले रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाथ के पुतले को बना रहा है। आलम द्वारा इन पुतलों को बनाने से इस दशहरे में हिन्दू और मुस्लिम भाई चारे की एक शानदार मिसाल यहां दिखाई देती है।
शाम होते ही आसमान में विभिन्न रंग की आतिशबाजी दिखाई देने लगी। 200 से अधिक रंगीन आतिशबाजीयां हुई हैं जो विभिन्न प्रकार की थी। इस संबंध में आयोजकों कहना है कि हमारा प्रयास रहता है कि लोगों को हर वर्ष कुछ नया देखने को मिले। इसमें हम काफी हद तक सफल भी हुए हैं और हर वर्ष तरहइस वर्ष भी आतिबाजी लोगों के आकर्षण का केंद्र था|
इस दशहरे में शहर के साथ-साथ ग्रामीण अंचल और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में श्रधालु आते हैं। हर बार आयोजन में लगभग 35 से 40 हजार की भीड़ जुटती है। शाम पांच बजे से शुरू होने वाला आयोजन रात 7.30 बजे तक चलता है। पंजाबी दशहरा प्रतिवर्ष प. रविशंकर शुक्ल, राइट टाउन स्टेडियम में मनाया जाता था। पंजाबी दशहरा शहीद स्मारक फिर रानी ताल मैदान में मनाया जाता था। और अब यह दशहरा गीताधाम के पास पंजाबी-हिन्दू एसोसिएशन के तत्वावधान में शासकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय परिसर ग्वारीघाट में पास मैदान में मनाया जाता है |