Events, Schedule & Program Details (आयोजन व कार्यक्रम)

ऐसे हुई पंजाबी दशहरे की शुरुआत

पंजाबी-हिन्दू एसोसिएशन के तत्वावधान में वर्ष 1950 में पेशकारी स्कूल छोटी ओमती में पंजाबी दहशहरा की शुरुआत हुई थी।
1. रावण व कुंभकरण का पुतला बड़ा होने की वजह से कंट्रोल रूम में इसका आयोजन हुआ।
2. वर्ष 1953 में प्रशासन ने NCCमैदान में आयोजन कराया।
3. 1981 में प्रशासन ने राइट टाउन स्टेडियम में अनुमति दी।
4. वर्ष 2015 में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए स्पष्ट कर दिया था कि अगले वर्ष से समिति व प्रशासन नई जगह तय कर दी।

मुस्लिम कलाकार द्वारा बनाये जाते हैं, रावण के पुतले

पंजाबी दशहरे की खास बात यह है रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाथ के पुतले को आलम आतिशबाज नामक कलाकार बनाता है। यह कलाकार पिछले 35 वर्षों से पंजाबी दशहरे में दहन किये जाने वाले रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाथ के पुतले को बना रहा है। आलम द्वारा इन पुतलों को बनाने से इस दशहरे में हिन्दू और मुस्लिम भाई चारे की एक शानदार मिसाल यहां दिखाई देती है।

200 से अधिक अलग-अलग रंग की हुई आतिशबाजीयां

शाम होते ही आसमान में विभिन्न रंग की आतिशबाजी दिखाई देने लगी। 200 से अधिक रंगीन आतिशबाजीयां  हुई हैं जो विभिन्न प्रकार की थी। इस संबंध में आयोजकों कहना है कि हमारा प्रयास रहता है कि लोगों को हर वर्ष कुछ नया देखने को मिले। इसमें हम काफी हद तक सफल भी हुए हैं और हर वर्ष तरहइस वर्ष भी आतिबाजी लोगों के आकर्षण का केंद्र था|